किसान की परीक्षा

एक गांव में एक किसान रहता था। वह बहुत ईमानदार था, वहा भगवान शंकर जी का परम भक्त था और हमेशा सच बोला करता था। किसान अपनें खेतों में बहुत मेहनत, लगन व ईमानदारी से काम करता। किसान की परीक्षा उसके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। धीरे-धीरे फसल बहुत अच्छी होने लगी और अच्छे दामों पर बिकने लगी। समय बितता गया ओर एक दिन वह अमीर किसान हो गया। अच्छा घर, गाड़ी गांव में वहा सबसे सफल ओर प्रसिद्ध किसान हो गया था। गांव के सभी लोग उसका गुणगान करने करते थे, लेकिन किसान ने शंकर जी की भक्ति करना नही छोड़ी।

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किसान की परीक्षा: एक प्रेरणादायक कहानी

एक बार जब शंकर जी किसान की प्रशंसा कर रहे थे, तभी माता पार्वती ने कहा –
“स्वामी! आप इस किसान की इतनी प्रशंसा किया करते हैं…क्यों न आज किसान की परीक्षा ली जाए और जाना जाए कि क्या वह सचमुच इसके लायक है या नहीं?भगवान शंकर बोले…..“ठीक है ! अभी किसान गहरी निद्रा में है आप उसके स्वप्न में जाएं और उसकी परीक्षा लें।”

किसान की परीक्षा से यह भी सिखने को मिला कि भक्ति और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।

कुछ ही क्षण बाद किसान को एक स्वप्न आया।स्वप्न में माता पार्वती उनके सामने आई और बोलीं…..“हे मनुष्य ! मैं पार्वती हूँ।” किसान को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और वो बोला, “हे माता आपने साक्षात अपने दर्शन देकर मेरा जीवन धन्य कर दिया है, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ ?”

किसान की परीक्षा में उसकी निष्ठा और मेहनत का महत्व था।

माता पार्वतीः- कुछ नहीं! मैं तो बस इतना बताने आई हूँ, कि
वर्षों से तुम्हारे घर में निवास करते-करते मैं ऊब चुकी हूँ और मैं यहाँ से जा रही हूँ।
किसान बोला, मेरा आपसे निवेदन है कि आप यहीं रहे, किन्तु अगर आपको यहाँ अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं भला आपको कैसे रोक सकता हूँ, आप अपनी इच्छा अनुसार जहाँ चाहें जा सकती हैं।
और माता पार्वती उसके घर से चली गई।
थोड़ी देर बाद वे रूप बदल कर पुनः माता पार्वती किसान के स्वप्न में यश के रूप में आयीं और बोलीं, किसान मुझे पहचान रहे हो?
किसान – नहीं महोदय आपको नहीं पहचाना।
यशः- मैं यश हूँ, मैं ही तेरी कीर्ति और प्रसिद्धि का कारण हूँ,
लेकिन अब मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता।
क्योंकि माता पार्वती यहाँ से चली गयी हैं अतः मेरा भी यहाँ कोई काम नहीं।
किसानः- ठीक है, यदि आप भी जाना चाहते हैं तो वह भी सही।”
किसान अभी भी स्वप्न में ही था और किसान ने देखा कि वह निर्धन हो गया हैं और फसल भी बेकार हो रही है। और धीरे- धीरे उसके सारे रिश्तेदार व मित्र भी उससे दूर हो गए हैं। यहाँ तक की जो लोग…
उसका गुणगान किया करते थे वो भी अब बुराई करने लगे हैं।
कुछ और समय बीतने पर माता पार्वती धर्म का रूप धारण कर पुनः किसान के स्वप्न में आयीं और बोलीं, “मैं धर्म हूँ।”
माता पार्वती और यश के जाने के बाद मैं भी इस निर्धनता में तुम्हारा साथ नहीं दे सकता , मैं जा रहा हूँ। ”
जैसी आपकी इच्छा, किसान ने कहा
और धर्म भी वहाँ से चला गया।
कुछ और समय बीत जाने पर माता पार्वती सत्य के रूप में स्वप्न में प्रकट हुईं और बोलीं, मैं सत्य हूँ।
माता पार्वती, यश, और धर्म के जाने के बाद अब मैं भी यहाँ से जाना चाहता हूँ।
ऐसा सुन किसान ने तुरंत सत्य के पाँव पकड़ लिए..
और बोला….“हे महाराज मैं आपको नहीं जानें दूंगा।
भले ही सब मेरा साथ छोड़ दें…मुझे त्याग दें पर कृपया आप ऐसा मत कीजिये,… सत्य के बिना मैं एक पल भी नहीं रह सकता,…यदि आप चले जायेंगें तो मैं तत्काल ही अपने प्राण त्याग दूंगा।”
लेकिन तुमने बाकी तीनों को तो बड़ी आसानी से जाने दिया , उन्हें क्यों नहीं रोका ??
सत्य ने प्रश्न किया।
किसान बोला, मेरे लिए वे तीनों भी बहुत महत्त्व रखते हैं, लेकिन उन तीनों के बिना भी मैं भगवान के नाम का जाप करते-करते उद्देश्यपूर्ण जीवन जी सकता हूँ , परन्तु यदि आप चले गए तो…
मेरे जीवन में झूठ प्रवेश कर जाएगा और मेरी वाणी अशुद्ध हो जायेगी , भला ऐसी वाणी से मैं अपने भगवान की वंदना कैसे कर सकूंगा………..?
मैं तो किसी भी कीमत पर आपके बिना नहीं रह सकता।
किसान का उत्तर सुन सत्य प्रसन्न हो गया…और उसने कहा…
तुम्हारी अटूट भक्ति ने मुझे यहाँ रुकने पर विवश कर दिया और अब मै यहाँ से कभी नहीं जाऊँगा”….
और ऐसा कहते हुए सत्य अंतरध्यान हो गया।
किसान अभी भी निद्रा में था।
थोड़ी देर बाद स्वप्न में धर्म वापस आया और बोला, “ मैं अब तुम्हारे पास ही रहूँगा क्योंकि यहाँ सत्य का निवास है।”
किसान ने प्रसन्नतापूर्वक धर्म का स्वागत किया।
उसके तुरंत बाद यश भी लौट आया और बोला, “ जहाँ सत्य और धर्म हैं वहाँ यश स्वतः ही आ जाता है, इसलिए अब मैं भी तुम्हारे साथ ही रहूँगा।”
किसान ने यश की भी आव-भगत की।
और अंत में माता पार्वती आईं।
उन्हें देखते ही किसान विनम्रतापुर्वक होकर बोला
हे माता ! क्या आप भी पुनः मुझ पर कृपा करेंगी…?”
“अवश्य…जहां सत्य, धर्म और यश हों वहाँ मेरा वास निश्चित है।”
माता पार्वती ने उत्तर दिया।
यह सुनते ही किसान की नींद खुल गई ।
किसान को यह सब स्वप्न लगा,
पर… वास्तविकता में वह एक कड़ी परीक्षा से उत्तीर्ण हो कर निकले थे।
मित्रों, हमें भी हमेशा याद रखना चाहिए कि जहाँ सत्य का निवास होता है वहाँ यश, धर्म और लक्ष्मी का निवास स्वतः ही हो जाता है।
सत्य है तो सिद्धि, प्रसिद्धि और समृद्धि है..!!

जब किसान की परीक्षा हुई, तो उसने दिखाया कि सच्ची भक्ति और मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।

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