ईमानदारी का फलः एक प्रेरणादायक कहानी
एक छोटा सा गांव था उस गांव के आस-पास व चारो तरफ हरियाली रहती थी। लेकिन एक समय ऐसा आया कि उस गांव में आकाल की स्थिति हो गई थी उसी गांव में एक रामलाल नाम का किसान भी रहता था। वह बहुत ईमानदार व मेहनती व्यक्ति था। (ईमानदारी का फल मीठा होता है।)
- एक दिन गांव में आकाल की स्थिति होने के कारण सोचने लगा कि गांव में तो सब जगह काल की स्थिति हो गई है। लगता नहीं कि अब इस गांव में ज्यादा दिन रुकना उचित होगा काम के लिए बाहर गांव तो जाना ही पड़ेगा रामलाल काम की तलाश में दूसरे गांव की ओर निकल पड़ता है। चलते-चलते वह विजयनगर गांव में आ जाता है। वहां उसका रहने का कोई ठिकान नही था। ओर उसके पास काम भी नही था। चलते-चलते वह एक अमीर किसान धनपत सेठ के पास आ पहुंचता है,

ईमानदार व्यक्ति कभी भी झूठ नही बोलता, चाहे परिस्थिति केसी भी हो।
रामलालः- सेठ जी में रामलाल दूसरे गांव से आया हूँ। हमारे गांव में आकाल की परिस्थिति हो गई है। गांव में लोगों के खेत सूखे पड़े हैं, गांव में बूंद बूंद पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। अगर मुझे आपके पास कुछ काम मिल जाए तो बहुत कृपा होगी बड़े भाई,
सेठः- तुम्हारी हालत बहुत खराब हो गई है। वैसे मेरे पास एक काम तो है, पर लगता नहीं कि तुम वो काम कर पाओगे,
रामलालः- सेठ जी आप चिंता ना करें मुझे आप कोई भी काम दे सकते हैं। मैं वह काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करूंगा।
सेठः- अच्छा ठीक है, कान खोलकर सुन लो मेरे पास 50 गाय और 50 भैसें हैं। तुम्हें हर रोज उन जानवरों का गोबर हटाना होगा और रोज सुबह-शाम उन्हें चारा पानी की देखरेख करनी होगी। । महीने के आखिर में तुम्हें इस काम के लिए 200 रुपये मिलेंगे ओर हाँ दो वक्त का खाना भी हमारी तरफ से मुफ्त दिया जाएगा बोले क्या तुम यह काम कर पाओगे।
रामलालः- अरे बाप रे 50 गाये ओर भैसों को सभालना आसान काम नहीं है। पर अब मैं कुछ कर भी तो नहीं सकता और ऊपर से सेठ जी दो वक्त का खाना भी दे रहे हैं। ठीक है सेछ जी में यह काम कर लूगा पर एक विनती है।
सेठ– हाँ बोलो रामलाल क्या बात है।
रामलाल– अगर आपको समस्या ना हो तो क्या मैं आपके गायों के साथ गौशाला में रह सकता हूँ। सेठ जी मैं इस गांव में नया हूँ, मेरा रहने का कोई ठिकाना नहीं है।
धनपत सेठः- थोड़ी देर सोचता है और रामलाल को ऊपर से नीचे तक देखने के बाद उसे कहता है ठीक है रामलाल तुम गौशाला में रह सकते हो
रामलालः- जी धन्यवाद सेठ जी
- अब से रामलाल गौशाला में रहकर अपना काम करने लगता है। वह रोज जल्दी उठकर गए और भैंसों का गोबर हटाता उन्हें चारा डालता और समय पर पानी भी पिलाता था। हर रोज रामलाल अपना काम ईमानदारी और पूरी मेहनत से करता था। धनपत सेठ को भी रामलाल का काम बहुत पसंद आने लगा, क्योंकि वह अपना काम सफाई से करता था। एक दिन धनपद सेठ रामलाल को बुलाकर उससे बोलता है।
धनपत सेठः- रामलाल मुझे तुम्हारा काम बहुत पसंद आया है। तुम गाय और भैंसों का अच्छा ख्याल रख रहे हो, इस लिये दूध की गुणवत्ता भी बढ़ गई है। और गाय पहले से ज्यादा दूध भी दे रही है। इसलिए मैं आज से तुम्हारी तनख्वाह बढ़ाकर पूरे 400 रूपये कर रहा हूँ।
रामलालः- आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सेठ जी
- कुछ दिन ऐसे ही बीतने लगते हैं। रामलाल धनपत सेठ के पास बहुत मेहनत और ईमानदारी से काम करता है। धीरे-धीरे रामलाल के पास अच्छा खासा रूपया जामा हो जाता है। जिससे वह अपने लिए छोटा सा रहने लायक एक घर बनवा लेता है ।
रामलालः- उस गौशाला में सो कर तो नाक से गोबर की गंध अभी भी नहीं जा रही। अब आखिरकार मुझे अपने घर में चैन से सोने को तो मिलेगा
- तब से रामलाल धनपत सेठ के पास गौशाला में काम करने आता और दो वक्त का खाना खाकर अपने घर सोने के लिए चला जाता था। कई साल ऐसे ही बीत जाते हैं। रामलाल की मेहनत के कारण उसके पास अच्छा खासा रुपया जमा हो जाता है। एक दिन रामलाल धनपत सेठ से बोलता है
रामलालः- सेठ जी आजकल गांव में चोरी की समस्या बहुत बढ़ गई है। और मेरे पास कुछ रुपए भी जमा है। जो मैंने अपने घर में रखे हुए हैं। पर मुझे उन पैसों की चोरी की चिंता हो रही है। आपको तो पता है। कि मैं दिन भर आपके पास ही काम करता हूँ। और सिर्फ रात में ही घर सोने जाता हूँ। इसलिए मुझे रोज पैसों की चोरी की चिंता सताती है। धनपत सेठः- हां रामलाल तुम बात तो बिल्कुल सही कह रहे हो, आये दिन गांव में नई-नई चोरी की बाते सामने आ रहे हैं। और दिन भर तो तुम्हारा घर खाली ही रहता है। तो चोरी होने की संभावना तो जरूर है।
धनपत सेठ से थोड़ी देर सोचता है और फिर रामलाल से कहता है
धनपत सेठः- देखो रामलाल ऐसे समय में तो गांव में एक ही जगह है। जहां पर तुम्हारा धन सुरक्षित रह सकता है। और वह है, जमीदार का घर
- क्या इस जमीदार का घर रामलाल ने कहां
धनपत सेठः- हाँ रामलाल इस गांव के जमींदार बहुत ईमानदार और दयालु है। ऐसा मैंने कुछ लोगों से सुना है। और उनके घर पर बहुत सारे पहरेदार भी रहते हैं। तो चोरी होने की संभावना बहुत कम है। तुम अपने पैसे उनके पास रख सकते हो,
रामलालः- अच्छा ऐसा है क्या सेठ जी फिर आज ही में जमींदार जी से मिलकर बात करता हूँ, और उन्हें अपनी समस्या बताता हूँ।
उसे दिन रामलाल जमींदार जी के घर उनसे बात करने जाता है। जमींदार के घर के दरवाजे पर पहुचते ही
पहरेदारः- ए रूको कहां अन्दर आते हो वहीं रूक जाओं
रामलालः- हल्की आवाज में जी मुझे जमींदार जी से मिलना है। मुझे उनसे कुछ काम है।
पहरेदारः- क्या काम है। तुमको उनसे मुझे जरा बताओ
रामलालः-जी मुझे कुछ पैसे रखवाने थे, उनके पास यही काम के लिए आया था।
पहरेदारः- अच्छा ठीक है। तुम अंदर जा सकते हो
रामलालः- घर के अन्दर पहुच कर नमस्ते जमींदार जी मैं रामलाल धनपत सेठ के यहां काम करता हूँ कुछ साल पहले ही मैं दूसरे गांव से यहां आया हूँ।
जमींदारः- अच्छा रामलाल बोलो तुम्हारा क्या काम है। मेरे पास
रामलालः- जमींदार जी मैं सालों से धनपत सेठ के पास काम कर रहा हूं और मैंने कुछ रुपए भी जमा कर लिए हैं, पर बात यह है कि गांव में चोरी की समस्या बहुत बढ़ गई है। तो मुझे अपने रुपए घर में रखने से डर लग रहा है।
जमींदारः- अच्छा कितने रुपए जमा किए हैं? तुमने
रामलालः- जमीदार जी यहीं कोई 10 हजार रूपये होंगे मेरे पास
जमींदारः- हा यह तो बड़ी रकम है
रामलालः- मैंने आपकी ईमानदारी के बारे में लोगों से बहुत सुना है। इसलिए मैं अपनी रकम आपके पास कुछ वक्त के लिए रखने आया हूँ।
जमींदारः- हाँ रामलाल तुमने बिलकुल सही सुना है। तुम्हारी रकम मेरे पास पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी हैं। तुम अब चिंताई ही छोड़ दो मैं सब देख लूंगा
रामलालः- ये पूरे 10 हजार हैं आप गिन कर देख लीजिए।
जमींदारः- गिनने की क्या जरूरत है। तुम तो धनपत सेठ के आदमी हो मुझे तुम पर पूरा विश्वास है
रामलालः- जमीदार जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अब मुझे चोरों का कोई डर नहीं है, क्योंकि मेरे पैसे सुरक्षित हाथो में है।
जमींदारः- अरे रामलाल कोई बात नहीं धन्यवाद तो मुझे बोलना चाहिए जो तुम मेरे पास आए अपने रुपए रखने के लिए रामलाल अपने पैसे जमींदार को देकर अपने घर चला जाता है
जमींदारः- हाँ…हाँ…हाँ रामलाल तुम्हारे पैसे मेरे हाथों में ही अच्छे लगते हैं।
- ऐसे ही रामलाल ईमानदारी और मेहनत से धनपत सेठ के यहां काम करता रहा देखते ही देखते 2 साल बीत जाते हैं। एक दिन रामलाल सोचता है। अब बहुत साल हो गए धनपत सेठ के यहां काम करते हुये लेकिन सेठ जी बहुत अच्छे इंसान है। पर सोच रहा हूं कि खुद की जमीन लेकर उसे पर मेहनत करूं तभी मैं बड़ा आदमी बन सकता हूं। अब जो मेरे पास थोड़े कुछ पैसे हैं। और जो जमीदार के पास कुछ पैसे संभालने के लिए दिए हैं। वो जमा करके थोड़ी जमीन खरीद लूंगा। आज ही जमींदार से मिलने जाता हूँ और अपने रुपए मांगता हूं। ये सोचकर रामलाल जमींदार जी के घर चला जाता ।
रामलालः- जमींदार जी मैं अपने रुपए वापस लेने आया हूं आपके पास मैनें 10 हजार दिए थे संभालने के लिए
जमींदारः- अरे भाई साहब मैंने पहचाना नहीं आपको वैसे कौन हो आप
रामलालः- अरे जिम्मेदार जी में रामलाल हूँ 2 साल पहले मैंने आपको पैसे संभालने के लिए दिए थे, याद आया कुछ
जमींदरः- अरे भाई साहब मेरे पास कितने सारे लोग आते जाते हैं। पैसे रखने के लिए ओर सभी के साथ मेरा अच्छा व्यवहार होता है। वैसे आपके पास कोई कागजात है, क्या क्योंकि मैं हर व्यक्ति से कागज पर ही व्यवहार करता हूँ। किसने कितने पैसे दिये किसने कितने पैसे लिये, सबका व्यवहार रहता है, मेरे पास
रामलालः- जमींदार जी ये आप क्या बात कर रहे हैं। अपकी ईमानदारी देखकर ही मैंने आपको पैसे दिए थे संभालने के लिए और आप ऐसी बातें कर रहे हैं। कृपा करे मेरे पैसे मुझे वापस दीजियें हाँ
जमींदरः- रामलाल मैं इमानदारी से ही काम करता हूं, इस लिया तुमसे मैं कागजात मांग रहा हूँ क्या तुम्हे पाता नही तुम किसी से पैसों का व्यवहार करते हो तो तुम्हें स्टांप पेपर पर लिख कर देना पड़ता है। तुम किसी से भी पूछ सकते हो
रामलालः- नहीं जमींदार जी मैं आपके पैर पढ़ता हूं कृपया करके मेरे रुपए मुझे दे दीजिए। बड़ी मेहनत से मैंने वह पैसे जमा किए थे, मुझ पर ऐसा अन्य ना करें
जमींदारः- क्या ये झूठ-मूठ का रोना लगाये हुआ है। लगता है, तुम ढोंगी हो और मेरी ईमानदारी और भोलेपन का फायदा उठाकर मुझे यह रुपए लेने आए हो, रुक अभी सबक सिखाता हूँ।
जमींदर अपने आदमी को बुलाकर रामलाल को मारने के लिये कहता हैं
जमींदरः- इसे तब तक मारो जब ते ये बेहोश न हो जाये। इस दो कोडी के आदमी ने मेरी इमानदारी पर सवाल उठाया है। इसे छोड़ना मत,
- जमींदार के आदमी रामलाल को खूब मारते है। फिर रामलाल दुखी होकर अपने घर चला जाता हैं। रामलाल के शरीर पर घाव के निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। दो दिन से रामलाल घाव के दर्द के कारण धनपत सेठ के घर काम के लिए नहीं जा पता है। इसलिए अगले दिन धनपत सेठ रामलाल के पास आ जाते हैं वह देखते हैं कि रामलाल चारपाई पर सो रहा है। और वह बड़ा ही चिंता में नजर आ रहा है।
धनपत सेठः- रामलाल भाई तुम दो दिन काम पर नहीं आए, क्या हुआ भाई तबीयत ठीक है ना, तुम्हारी कुछ समस्या है क्या
रामलालः- अरे सेठ जी आप आए हो आप खबर भिजवा दे तो मैं खुद चलता आता
धनपत सेठः- अरे रामलाल कोई बात नहीं तुम्हें देखकर लगता है तुम बीमार हो, क्या हुआ है। तुम्हें
रामलालः- सेठ जी क्या बताऊं जिस जमींदार के पास 02 साल पहले मैंने अपने पैसे संभालने को दिए थे। वह आज मुझे पैसे वापस नहीं करना चाहता । वह बहुत लालची इंसान है। वह लोगों को ठग रहा है और जब मैं बाद में गिड़गिड़ाना शुरू किया तो उसके आदमियों ने मुझे डंडे से मारा पीटा है। और मुझे वहां से धक्के मार कर निकाल दिया है।
सेठः- अरे बाप रे ये तो बहुत ही गम्भीर विषय है। मैंने तो जमीदार के बारे में अच्छा ही सुना था पर मुझे भी नहीं पता था कि वह इंसान इतना गिरा हुआ है। तभी मैं सोचूं हर साल उसके संपत्ति इतनी ज्यादा कैसे बढ़ रही है। मुझे माफ कर दो रामलाल मैनें ही तुम्हे जमीदार के पास जाने को बोला था। गलती तो मेरी भी है।
रामलालः- नहीं सेठ जी आप तो मेरा अच्छा ही सोच रहे थे। यह तो जमींदार का लालच है। अब लगता नहीं मेरे पैसे उसे जमींदार से वापस मिलेंगे भी
सेठः- रामलाल मेरे पास एक तरकीब है जिससे मैं तुम्हारे पैसे तुम्हें वापस दिला सकता हूं। सेठ रामलाल के कान में सारी तरकीब बताता है
रामलालः- ठीक है सेठ जी ये तरकीब कामयाब होने दीजियें
अगले दिन धनपत सेठ बहुत सारे पैसों को एक सूटकेस में भरकर खुद जमींदार के घर जाता है।
जमींदारः- अरे धनपत सेठ आप आज आप खुद यहां बोल भाई इस गरीब के घर कैसे आना हुआ। हमारा तो यह सौभाग्य है कि आप जैसे धनी आदमी के चरण हमारे घर में पड़े हैं।
सेठः- नमस्ते जमींदार जी अरे जमींदार जी आप तो मुझे अब लज्जित कर रहे हैं। वैसे मैं कुछ महीनो के लिए दूसरे राज्य में व्यापार करने जा रहा हूं मैं यह लगभग 70 हजार रूपये लाया हूं मुझे डर है कि कहीं यह चोरी ना हो जाए क्या आप मेरे सारे पैसे अपने पास संभाल कर रख सकते हैं। आपके सिवाये इस गांव में और किसी पर भरोसा नहीं कर सकता
जमींदारः- अरे धनपत सेठ यह भी कोई पूछने की बात है मेरे पास आपके पैसे बिल्कुल सुरक्षित रहेंगे। आप निश्चित होकर व्यापार करने जा सकते हैं इस बार तो बड़ी मछली हाथ लगी है बार-बार ऐसा मौका नहीं मिलता भारी माल हाथ में लगने वाला है। तभी वहां पर रामलाल आ जाता है।
जमींदरः- अरे रामलाल तुम, अच्छा हुआ तुम आ गये, मैं तुम्हारे पास ही आने वाला था। मुझे माफ करना उस दिन तुम्हें पहचान नहीं पाया इतने सारे लोग मेरे पास आते हैं। तो जरा परेशानी होती है पर मैं अपनी बातों का बड़ा पक्का हूँ हां रूको मैं तुम्हारे सारे पैसे अभी ही देता हूँ।
जमींदार रामलाल के सारे पैसे उसे लौटा देता है
जमींदरः- माफ करना रामलाल मेरे आदमियों ने तुम्हारे साथ उसे दिन बदतमीजी की में उनको आज ही काम से निकलता हूँ। रामलाल बिना कुछ बोले वहां से चला जाता है
सेठः- अरे क्या बात है जमींदार जी आप तो अपने बातों के बहुत पक्के हैं। तो ठीक है मैं अपने सारे पैसे आपके पास रख सकता हूँ।
- तभी वहा धनपत सेठ का नैकर आ जाता है मालिक मालिक अब आपको बहार के राज्यो में जाने की कोई जरूरत नहीं है अभी-अभी व्यापारियों का संदेश आया है और उन्होने कहा कि वह खुद हमारे गांव आ रहे हैं।
सेठः- यह तो बहुत बढ़िया बात हुई अब मुझे इतनी दूर नहीं जाना पड़ेगा सुन रहे हो जमींदार जी व्यापारी आ रहे हैं। अब मुझे नहीं लगता कि यह पैसे आपके पास रखने का कोई मतलब होगा। चलो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इतनी ईमानदारी दिखाई मुझे हाँ अगली बार जरूर आपके पास ही आऊंगा
- इतना कहकर धनपत सेठ वहां से अपने पैसे लेकर चले जाते हैं
जमींदारः- अरे यह क्या हो गया यह 70 हजार रूपये तो चले गए और जो रामलाल के 10 हजार रूपये हड़प लिए थे। वो भी चले गये,
रामलालः- आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सेठ जी अगर आज आप ना होते तो मेरी सारी जमा पूंजी वो जमींदार हड़प लेता
सेठः- रामलाल कोई बात नहीं
शिक्षाः-
जो व्यक्ति मेहनत और ईमानदारी से काम आता है ऊपर वाले उसका कभी बुरा नहीं होने देते और जो हराम की कमाई का खाता है उसका कभी अच्छा नहीं होने देते
- ईमानदारी सबसे बड़ी पूँजी है।, तो कभी खत्म नही होती।
- ईमानदार इंसान का चेहरा महेशा निडर होता है।
- सच्चाई की राह मुश्किल हो सकती है लेकिन मंजिल मीठी होती है।
- झूठ के पाँव होते है लेकिन ईमानदारी की उम्र लंबी होती है।
- ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है। सच्चाई और सच्चा व्यवहार अंत में सम्मान और सुख दिलाता है।
ईमानदारी एक ऐसा गुण है। जो न केवल व्यक्ति को महान बनाता है। बल्कि समाज को भी बेहतर बनाता है।